सहरसा में गेहूं की खेती का रकबा घटने के बाद अब इसका असर पशुपालकों पर भी दिखाई देने लगा है। गेहूं की फसल कम होने के कारण भूसे की उपलब्धता प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। इसी बीच स्थानीय स्तर पर भूसे के दाम में बढ़ोतरी से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशुपालकों के लिए भूसा पशुओं के चारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पशुओं को खिलाने की लागत भी बढ़ रही है। पहले की तुलना में अब किसानों और पशुपालकों को चारा खरीदने के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। बढ़ती लागत का असर छोटे और सीमांत पशुपालकों पर ज्यादा पड़ सकता है। सहरसा में गेहूं की खेती में कमी और भूसे की उपलब्धता के बीच संबंध को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। गेहूं की फसल से निकलने वाला भूसा पशुओं के लिए

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इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए गेहूं का उत्पादन कम होने पर भूसे की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बिगड़ने पर कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बढ़ते भूसे के दाम के बीच पशुपालकों के सामने अपने पशुओं के लिए पर्याप्त और सस्ता चारा उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए चारे की लागत बढ़ना उनकी कुल आय और खर्च के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। इस वीडियो में जानिए सहरसा में गेहूं की खेती का रकबा घटने से भूसे की उपलब्धता पर क्या असर पड़ रहा है, भूसे के दाम में क्यों उछाल देखने को मिल रहा है और इसका किसानों व पशुपालकों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। सहरसा और कोसी क्षेत्र की खेती, किसान, पशुपालन और स्थानीय बाजार से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर के लिए जुड़े रहिए Saharsa Now के साथ।