सहरसा में एक अधिकारी का ऐसा अंदाज देखने को मिला, जिसने स्कूल निरीक्षण को एक अलग ही तस्वीर में बदल दिया। डीडीसी गौरव कुमार निरीक्षण के दौरान सिर्फ स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे क्लासरूम में पहुंचे और बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका निभाई। यह मामला सहरसा जिला गर्ल्स स्कूल का है, जिसे मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान डीडीसी गौरव कुमार ने सबसे पहले शिक्षकों से बातचीत की और स्कूल में पढ़ाई, व्यवस्थाओं तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने क्लासरूम में जाकर छात्राओं से बातचीत शुरू की और पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे।

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डीडीसी ने डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल करते हुए बच्चों को खुद पढ़ाया। उन्होंने छात्राओं की वीकली टेस्ट की कॉपियां भी जांचीं और उनकी पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुझाव दिए। अधिकारी को अपने बीच शिक्षक की भूमिका में देखकर छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिला। एक छात्रा ने बताया कि डीडीसी सर ने उन्हें पढ़ाया, सवाल पूछे और पढ़ाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। छात्राओं के लिए यह अनुभव अलग और उत्साह बढ़ाने वाला रहा। डीडीसी गौरव कुमार का यह अंदाज शिक्षा व्यवस्था को जमीन पर समझने की एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। स्कूल निरीक्षण के दौरान बच्चों से सीधे संवाद करने और उनकी कॉपियां जांचने से पढ़ाई की वास्तविक स्थिति को समझने में भी मदद मिल सकती है। यह पहल शिक्षकों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है कि बच्चों की शिक्षा और उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए लगातार संवाद और निगरानी जरूरी है। इस वीडियो में देखिए सहरसा के डीडीसी गौरव कुमार का शिक्षक वाला अंदाज, कैसे उन्होंने डिजिटल बोर्ड पर बच्चों को पढ़ाया और छात्राओं की कॉपियां जांचकर उन्हें पढ़ाई के टिप्स दिए। सहरसा की ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और स्थानीय खबरों के लिए जुड़े रहिए Saharsa Now के साथ।