बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई साल हो चुके हैं। सरकार की ओर से शराबबंदी को सामाजिक बदलाव और परिवारों की बेहतरी से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि इसका असर जमीन पर कितना दिखाई देता है? क्या शराबबंदी के बाद गरीब और महादलित परिवारों की जिंदगी वास्तव में बदली है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए Saharsa Now की टीम पहुंची रामपुर मुसहरी। यहां हमने स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत की और जानने की कोशिश की कि शराबबंदी के बाद उनके परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी में क्या बदलाव आया। हमने लोगों से परिवार की आर्थिक स्थिति, रोजगार, बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और महिलाओं की स्थिति को लेकर सवाल किए। क्या शराब पर होने वाला खर्च कम होने से

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परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ? क्या महिलाओं को किसी तरह की राहत महसूस हुई? क्या बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य पर इसका कोई असर पड़ा? रामपुर मुसहरी के लोगों ने कैमरे पर अपने अनुभव और परेशानियां साझा कीं। किसी ने शराबबंदी के बाद हुए बदलावों की बात कही, तो किसी ने रोजगार और दूसरी बुनियादी समस्याओं को बड़ी चुनौती बताया। दरअसल, किसी भी बस्ती की तस्वीर केवल शराबबंदी से नहीं बदलती। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास और सरकारी योजनाओं की पहुंच भी लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है। तो क्या शराबबंदी के बाद रामपुर मुसहरी के परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदली? क्या महिलाओं और बच्चों के जीवन में सुधार आया? और आज भी इस बस्ती के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशती Saharsa Now की यह Ground Report देखिए और जानिए रामपुर मुसहरी के लोगों की जमीनी हकीकत।