12 साल से अपनी ऊंटनी के साथ जिंदगी का सफर तय कर रहे एक साधु की कहानी इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रही है। भिक्षाटन से अपना जीवन चलाने वाले इस साधु के लिए उनकी ऊंटनी सिर्फ सफर का साधन या कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य जैसी है। दोनों वर्षों से साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कर रहे हैं और अब उनकी यह अनोखी दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। साधु बताते हैं कि उन्होंने महज 10 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था और अयोध्या पहुंचकर साधु जीवन अपना लिया। आज उनका पूरा जीवन यात्रा और भिक्षाटन के सहारे चलता है। उनके साथ रहने वाली ऊंटनी उनके लंबे सफर की सबसे खास साथी बन चुकी है। खास बात यह है कि साधु खुद ऊंटनी पर बैठकर यात्रा नहीं करते। उनका कहना है

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कि वे अपनी साथी पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहते, इसलिए खुद पैदल चलते हैं। ऊंटनी की पीठ पर साधु की गृहस्थी का जरूरी सामान लदा रहता है, जबकि साधु पैदल उसके साथ चलते हैं। सफर के दौरान वह अपनी ऊंटनी के खाने-पीने का भी पूरा ध्यान रखते हैं और उसके लिए अलग से इंतजाम करते हैं। दोनों का यह साथ 12 साल पुराना है, जो इंसान और जानवर के बीच प्यार, भरोसे और अपनापन की एक अनोखी मिसाल पेश करता है। हाल ही में सौरबाजार के एक सरकारी स्कूल में साधु और उनकी ऊंटनी को कुछ देर के लिए पनाह मिली। इस दौरान लोगों को पता चला कि उनकी यह साथी ऊंटनी गर्भवती है और जल्द ही मां बनने वाली है। इस खबर से साधु भी बेहद खुश हैं।