देश में बढ़ती प्याज की कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। एक तरफ बाजार में प्याज के दाम लगातार बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर देश के उन प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है, जहां कीमतों का दबाव ज्यादा है। इसी व्यवस्था को कांदा एक्सप्रेस के नाम से चर्चा मिल रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त में प्याज की औसत खुदरा कीमत में पिछले साल के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी देखी गई। दिल्ली और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में प्याज के दाम आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा रहे हैं। वहीं नासिक मंडी में भी कीमतों में तेज उछाल की खबरें सामने आई हैं। सवाल है कि आखिर प्याज इतना महंगा क्यों हुआ?

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अगस्त और सितंबर का समय प्याज की सप्लाई के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पुराने रबी स्टॉक में कमी और नई खरीफ फसल की आवक में देरी से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। मौसम की अनिश्चितता, बुवाई में देरी और उत्पादन में संभावित कमी जैसे कारण भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। महाराष्ट्र देश का प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य है, इसलिए वहां की फसल और सप्लाई में बदलाव का असर देश के कई बाजारों तक पहुंचता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांदा एक्सप्रेस से प्याज सस्ता हो जाएगा? सरकार का उद्देश्य ज्यादा कीमत वाले बाजारों में अतिरिक्त प्याज पहुंचाकर सप्लाई बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। लेकिन खुदरा बाजार में असली असर नई फसल की आवक, मौसम, मंडी भाव, परिवहन लागत और वास्तविक सप्लाई पर निर्भर करेगा। इस वीडियो में जानिए प्याज की बढ़ती कीमतों