ई-रिक्शा: सुविधा या परेशानी का सबब? | सहरसा शहर में बढ़ती ई-रिक्शा की समस्या जब करीब 10-15 साल पहले शहर में पहली बार ई-रिक्शा की शुरुआत हुई थी, तब लोगों के बीच इसे लेकर काफी उत्साह था। कम किराए में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की सुविधा ने आम लोगों की यात्रा को आसान और सस्ता बना दिया था। एक स्टॉपेज से दूसरे स्टॉपेज तक महज 10 रुपये के किराए में सफर और जल्दी पहुंचने की सुविधा के कारण ई-रिक्शा लोगों की पसंद बन गया। लेकिन समय के साथ शहर में ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ती गई और अब यही सुविधा कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। शहर की सड़कों,

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चौक-चौराहों और प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खड़े नजर आते हैं। कई जगहों पर सड़क के किनारे और मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शा के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर में लगने वाले जाम को लेकर भी ई-रिक्शा के संचालन और पार्किंग व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। कई बार ई-रिक्शा चालक बिना हॉर्न दिए अचानक लोगों के बेहद करीब से गुजर जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह स्थिति परेशानी पैदा कर सकती है। पिछले साल प्रशासन की ओर से ई-रिक्शा को नंबर आवंटित कर अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए थे। शुरुआती कुछ दिनों तक व्यवस्था का पालन हुआ, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। सवाल यह है कि ई-रिक्शा आम लोगों के लिए सुविधा है या शहर की यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब? क्या निर्धारित रूट और पार्किंग व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की जरूरत है? सहरसा शहर की स्थानीय समस्याओं और जमीनी खबरों के लिए जुड़े रहिए Saharsa Now के साथ