2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया। इस भाषण में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, शिक्षा, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता से जुड़े कई बड़े लक्ष्य सामने रखे गए। प्रधानमंत्री ने विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन रखा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी व इनोवेशन, गति शक्ति, डिफेंस, ग्रीन व ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर में उत्पादन बढ़ाने, आने वाले वर्षों में नई सुविधाएं शुरू करने और भारत को ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा पर भी जोर दिया

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गया। युवाओं के लिए AI स्किलिंग को बढ़ावा देने और बड़ी संख्या में लोगों को AI की ट्रेनिंग देने की बात कही गई। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा भी महत्वपूर्ण रही। हालांकि इसकी पात्रता और लागू होने की तारीख से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार रहेगा। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर क्षमता का लक्ष्य रखा गया। साथ ही तेल और गैस के घरेलू उत्पादन, एक्सप्लोरेशन और पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया गया। क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, निकेल और कोबाल्ट में आत्मनिर्भरता को भविष्य की टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया गया। इसके अलावा युवाओं, खेल, इनोवेशन और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। कुल मिलाकर, भाषण का संदेश स्पष्ट था—AI, चिप्स, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, मैन्युफैक्चरिंग और युवा शक्ति के सहारे भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना। अब इन बड़े लक्ष्यों का वास्तविक असर उनके implementation, बजट और ground-level execution पर निर्भर करेगा।