केंद्र सरकार ने बिहार समेत देश के कई राज्यों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने कुल ₹13,041 करोड़ की पांच बड़ी सड़क और रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें बिहार के लिए Muzaffarpur–Sitamarhi–Sonbarsa NH-22 सेक्शन को फोरलेन करने की महत्वपूर्ण परियोजना शामिल है, जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से जुड़े चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी मिली है। बिहार की परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹3,591 करोड़ है और इसकी लंबाई लगभग 82.58 किलोमीटर बताई गई है। इस फोरलेन कॉरिडोर से मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा क्षेत्र के बीच सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। नेपाल सीमा के करीब स्थित इलाकों के लिए भी यह सड़क क्षेत्रीय

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कनेक्टिविटी और माल की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना में कई बड़े पुल, रेलवे ओवरब्रिज और फ्लाईओवर जैसे निर्माण भी प्रस्तावित हैं। वहीं, रेलवे के लिए करीब ₹9,450 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में Kharagpur–Bhadrak, Bhadrak–Haridaspur, Gummidipundi–Gudur और Cuttack–Paradeep सेक्शन में अतिरिक्त रेल लाइनें विकसित की जाएंगी। इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का कुल नेटवर्क प्रभाव करीब 410 किलोमीटर का होगा। इसका उद्देश्य व्यस्त रेल कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर करना और माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार के अनुसार इन रेलवे परियोजनाओं से सालाना करीब 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। इससे कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं की आवाजाही को गति मिल सकती है। हालांकि कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी परियोजनाओं को धरातल पर उतरने में टेंडर, भूमि संबंधी प्रक्रियाओं और निर्माण जैसे कई चरण पूरे करने होंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन परियोजनाओं का काम कितनी तेजी से शुरू होता है और आम लोगों तथा कारोबार को इसका वास्तविक लाभ कब मिलता है।