बिहार की मिट्टी, यहां की समृद्ध भाषा, संस्कृति और लोककथाएं अब बड़े पर्दे पर एक नए अंदाज में नजर आ सकती हैं। राज्य में जल्द फिल्म सिटी और फिल्म इंस्टीट्यूट बनाने की तैयारी को लेकर चर्चा तेज है। सरकार का दावा है कि इस पहल से बिहार में स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, कलाकारों को बेहतर अवसर मिलेंगे और बिहारी भाषाओं की फिल्मों को नई पहचान मिल सकेगी। नमस्कार, आप देख रहे हैं Saharsa Now। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से की गई घोषणा के मुताबिक, बिहार में फिल्म सिटी के साथ एक आधुनिक फिल्म इंस्टीट्यूट भी स्थापित करने की योजना है। इसका

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उद्देश्य केवल फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स की शूटिंग के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि अभिनय, निर्देशन, कैमरा, एडिटिंग और फिल्म निर्माण से जुड़े स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का मंच देना भी है। इस योजना की सबसे खास बात बिहार की क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की तैयारी है। भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और बज्जिका जैसी भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे बिहार की अपनी कहानियां, लोकजीवन, संस्कृति और विरासत बड़े स्तर पर देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंच सकती हैं। सरकार के मुताबिक, राज्य में 54 फिल्मों की शूटिंग के लिए सहमति भी दी जा चुकी है। अभिनेता और सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ तथा अभिनेता पवन सिंह समेत कई कलाकारों ने इस पहल का समर्थन किया है। वहीं अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी अक्टूबर में बिहार में फिल्म की शूटिंग करने की इच्छा जताई है। सरकार का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार की सकारात्मक छवि को मजबूत करने में मदद मिलेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार आने वाले वर्षों में फिल्म निर्माण का नया हब बन पाएगा? आने वाला समय इस महत्वाकांक्षी योजना की असली तस्वीर साफ करेगा।