बिहार में सरकारी नौकरी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। पटना के गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन और अनशन कर रहे हैं। इसी आंदोलन के समर्थन में पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी 16 अगस्त को एक दिवसीय उपवास पर बैठे। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी शामिल है। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। BPSC के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम परिणाम जून 2026 में जारी किया जा चुका है। आयोग के परीक्षा कैलेंडर में 70वीं CCE के लिए 2,035

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रिक्तियों का उल्लेख है। इसलिए परीक्षा रद्द करने की मांग फिलहाल अभ्यर्थियों की ओर से उठाई जा रही मांग है, इसे किसी सरकारी फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा सहायक प्राध्यापक बहाली से जुड़ा है। अभ्यर्थी UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में शोध और अकादमिक उपलब्धियों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। इसके अलावा बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने और भर्ती प्रक्रियाओं में स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखने की मांग भी उठ रही है। प्रदर्शनकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पप्पू यादव ने अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनरत अभ्यर्थियों से संवाद करती है या नहीं और उनकी मांगों पर क्या कदम उठाती है। फिलहाल रोजगार और भर्ती का मुद्दा बिहार में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अभ्यर्थी अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। सहरसा नाउ के लिए, मैं हूँ ______।