HEADLINE: सहरसा में बाढ़ और जलजमाव का कहर, गर्भवती महिला को खटिया पर अस्पताल ले जाने की मजबूरी   बिहार के सहरसा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बाढ़ और जलजमाव के बीच जमीनी हकीकत को सामने लाती है। जिले के कई इलाकों में पानी भरने से आम जनजीवन

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प्रभावित है। सड़कें जलमग्न हैं और लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच सहरसा से सामने आया एक मामला व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सड़क संपर्क और एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिलने के कारण एक गर्भवती महिला को उसके परिजन खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए। परिजन पानी से भरे रास्ते के बीच खटिया लेकर आगे बढ़ते नजर आए। यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आवागमन की चुनौतियों को भी सामने लाती है। गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवार के लिए बेहद जरूरी था, लेकिन रास्ते में जलजमाव के कारण सामान्य वाहन से अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें तत्काल एम्बुलेंस या सुगम सड़क मार्ग की सुविधा नहीं मिल सकी। ऐसे में उन्होंने खुद खटिया के सहारे महिला को पानी के बीच से निकालकर अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। सवाल यह है कि जब किसी इलाके में बाढ़ या जलजमाव की स्थिति पैदा होती है, तो क्या वहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? क्या गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? हालांकि, इस घटना को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। इसलिए यह भी जरूरी है कि पूरे मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच हो और यह पता लगाया जाए कि एम्बुलेंस या वैकल्पिक सहायता क्यों उपलब्ध नहीं हो सकी। फिलहाल यह तस्वीर सहरसा के बाढ़ प्रभावित इलाकों की मुश्किलों को बयां कर रही है। बाढ़ का पानी उतर जाएगा, लेकिन सवाल यह है—क्या ऐसी मजबूर तस्वीरें भी खत्म होंगी?