विदेशी मरीजों की पहली पसंद बना भारत! 16 साल में चार गुना बढ़ी मेडिकल टूरिज्म की रफ्तार नई दिल्ली: भारत अब केवल अपनी संस्कृति और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के कारण भी दुनिया भर में पहचान बना रहा है। पिछले 16 वर्षों में इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या में करीब चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है। बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, अनुभवी डॉक्टर और कम लागत में गुणवत्तापूर्ण इलाज भारत को मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और कई अन्य देशों से बड़ी संख्या में मरीज भारत इलाज कराने पहुंच रहे हैं। यहां उन्हें विकसित देशों की तुलना में काफी कम खर्च में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं। आखिर क्यों बढ़ रहा है मेडिकल टूरिज्म? भारत में विदेशी मरीजों की बढ़ती संख्या के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं— विश्वस्तरीय अस्पताल और आधुनिक चिकित्सा तकनीक। अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता। विकसित देशों की तुलना में कम लागत पर इलाज। कम समय में सर्जरी और उपचार की सुविधा। अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में चिकित्सा सहायता। आयुष, योग और वेलनेस सेवाओं का बढ़ता आकर्षण। किन बीमारियों के इलाज के लिए आते हैं विदेशी मरीज? भारत में सबसे अधिक विदेशी मरीज हृदय रोग, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी, आईवीएफ, कॉस्मेटिक सर्जरी और अन्य जटिल बीमारियों के इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के लिए भी विदेशों से लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा फायदा मेडिकल टूरिज्म के बढ़ने से देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ होटल, परिवहन, पर्यटन और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। भारत की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, कुशल डॉक्टरों और किफायती इलाज ने देश को विदेशी मरीजों की पहली पसंद बना दिया है। यही वजह है कि हर साल लाखों लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर भारत का रुख कर रहे हैं। देश, बिहार, स्वास्थ्य और मेडिकल से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें Saharsa Now के साथ।