सहरसा में नई चीनी मिल की स्थापना को लेकर सरकार की पहल कोसी क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। बिहार सरकार ने "सात निश्चय-3" के तहत "समृद्ध उद्योग–समृद्ध बिहार" अभियान में चीनी उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में सहरसा जिला प्रशासन नई चीनी मिल के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश में जुट गया है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में संभावित भूमि पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को जल्द सर्वे कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

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प्रशासन ने फिलहाल दो संभावित स्थानों की पहचान की है। पहला कहरा प्रखंड के मौजा देवन में है, जहां प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र से 30 से 50 एकड़ जमीन चीनी मिल के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। दूसरा विकल्प सौरबाजार प्रखंड के मौजा कपिया को माना गया है। अंतिम चयन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त जल संसाधन और अनुकूल जलवायु गन्ने की खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं। सरकार का भी मानना है कि सहरसा, अररिया और किशनगंज क्षेत्र में फैली लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि चीनी उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं रखती है। इसी वजह से गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। यदि सहरसा में चीनी मिल स्थापित होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिलेगा। उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे परिवहन खर्च कम होगा और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। परिवहन, गोदाम, मशीनरी, पैकेजिंग और छोटे व्यापार जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है, लेकिन यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो यह चीनी मिल कोसी क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।