गाँव में हाई स्कूल बन गया, 12वीं तक की पढ़ाई भी अब छात्राओं के लिए संभव है। लेकिन इसके बाद क्या? यही सवाल आज गाँव की बेटियों और उनके परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रेजुएशन और उच्च शिक्षा के लिए छात्राओं को सहरसा या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। कॉलेज दूर होने के कारण आने-जाने का खर्च, रोजाना लंबी दूरी तय करने की परेशानी, बाहर रहने की मजबूरी और बेटियों की सुरक्षा को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। कई परिवार चाहते हुए भी अपनी बेटियों को दूर शहर में पढ़ने भेज नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि कई छात्राओं की उच्च शिक्षा बीच में ही रुक जाती है या वे अपनी पसंद की पढ़ाई नहीं कर पातीं।

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सवाल सिर्फ एक कॉलेज का नहीं, बल्कि गाँव की बेटियों के भविष्य का है। जब गाँव में प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक शिक्षा की व्यवस्था हो सकती है, तो 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज की सुविधा क्यों नहीं? आखिर गाँव की बेटियों को ग्रेजुएशन करने के लिए घर से दूर जाने की मजबूरी कब खत्म होगी? क्या कॉलेज की दूरी बेटियों की पढ़ाई में बाधा बन रही है? गाँव की छात्राएँ और उनके परिवार इस समस्या को किस तरह देखते हैं? उनकी मांग क्या है और जिम्मेदारों से वे क्या उम्मीद रखते हैं? इस ग्राउंड रिपोर्ट में सुनिए छात्राओं और ग्रामीण परिवारों की आवाज और जानिए गाँव में कॉलेज की मांग को लेकर जमीनी हकीकत। शिक्षा, ग्रामीण समस्याओं, बेटियों की पढ़ाई और कोशी क्षेत्र के जमीनी मुद्दों से जुड़ी खबरों के लिए Saharsa Now से जुड़े रहिए।