घोंघेपुर पंचायत में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पंचायत में विकास सिर्फ कागज़ों पर दिखाई देता है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदहाल हैं। चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों ने सड़क, नल-जल, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन जीत के बाद अधिकांश वादे अधूरे रह गए। ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक उनके गांव में नल-जल योजना का लाभ नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि उन्हें आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गांव

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की गलियां कीचड़ से भरी रहती हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। खराब सड़कों के कारण किसानों को खेतों से फसल घर तक लाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाएं तो चल रही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण उनका लाभ जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा। उनका आरोप है कि पंचायत में ऐसा कोई विकास कार्य नहीं हुआ, जिसे लोग वर्षों तक याद रख सकें। कई ग्रामीणों ने बताया कि एक सड़क का निर्माण आधा छोड़ दिया गया और ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि घोंघेपुर पंचायत की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनका कहना है कि गांव में किसी भी समस्या के समय मुखिया हालचाल लेने तक नहीं आते। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली से गांव में भाईचारे की भावना कमजोर हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया, सरपंच और अन्य प्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण पंचायत का समुचित विकास नहीं हो पाया। ग्रामीण अब जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रहे हैं कि पंचायत में आखिर कौन-कौन से विकास कार्य हुए हैं। उनका आरोप है कि जनसेवा के बजाय रिश्वतखोरी का माहौल बन गया है और ऊपर से नीचे तक रिश्वत मांगने की वजह से विकास योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई और पंचायत में विकास कार्यों को गति देने की मांग की है।