सहरसा: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों की मांगों को लेकर पूर्व सांसद ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाने चाहिए। पूर्व सांसद ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा से पहले या बाद में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। उनका कहना था कि ऐसी घटनाएं न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि

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युवाओं का विश्वास भी कमजोर करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनके अनुसार, छात्रों की मांगों को अनदेखा करना उचित नहीं है और सरकार को उनसे संवाद कर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं को समझना और उन्हें निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। पूर्व सांसद ने मांग की कि पेपर लीक की घटनाओं की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाता है, तभी छात्रों का भरोसा बहाल हो सकेगा। उन्होंने छात्रों से भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। साथ ही कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके। पूर्व सांसद ने दोहराया कि छात्रों की जायज मांगों पर विचार कर सरकार को जल्द सकारात्मक पहल करनी चाहिए।