ज्ञानेश कुमार और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े कई सवाल सार्वजनिक चर्चा में हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में बताया गया कि इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच तथा SIR से जुड़े प्रक्रियात्मक फैसलों जैसे मुद्दे शामिल थे।

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इन रिपोर्टों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं और निर्णयों का बचाव किया है। चुनाव आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि आयोग के भीतर मतभेदों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए। इसी बीच 30 सितंबर को चुनाव आयोग ने उन राज्यों में Form 6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह कदम SIR से जुड़े प्रक्रियात्मक बदलावों पर चल रही चर्चा के बीच सामने आया है। SIR को लेकर कानूनी बहस भी आगे बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज और SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। इस वीडियो में जानिए ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे सवाल, SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग में दर्ज 14 आपत्तियों की रिपोर्ट और इस पूरे विवाद पर सामने आए अलग-अलग पक्षों की बात।