सहरसा में 74 वर्षों से चली आ रही नगर कीर्तन की परंपरा आज भी कायम है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्गा पूजा के पहले दिन सुबह चार बजे नगर कीर्तन की शुरुआत हुई। दर्जनों श्रद्धालु ढोलक, झाल, हारमोनियम, करताल और खंजरी के साथ राम नाम महामंत्र का जाप करते हुए नगर भ्रमण पर निकले। कीर्तन से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया। सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रोफेसर गिरिधर प्रसाद सिन्हा उर्फ पूटीश के मुताबिक, इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1952 में कायस्थ टोला मोहल्ले के पूर्वजों ने की थी। तभी से हर वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर नगर कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। आज शहर के युवा और बुजुर्ग मिलकर इस धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे

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हैं। प्रोफेसर सिन्हा ने बताया कि कोसी बांध के निर्माण से पहले कोसी की विभीषिका से बचाव की कामना के साथ राम नाम संकीर्तन शुरू किया गया था। आज भी नगर कीर्तन के दौरान शहर के प्रमुख दुर्गा मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भजन-कीर्तन किया जाता है। इस आयोजन में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। 74 वर्षों से जारी यह परंपरा सहरसा की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। बदलते समय के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह इस विरासत को जीवंत बनाए हुए है। देखिए सहरसा से सुभाष झा की यह खास रिपोर्ट और जानिए नगर कीर्तन की ऐतिहासिक परंपरा की पूरी कहानी। सहरसा, कोसी और मिथिलांचल की स्थानीय खबरों के लिए Saharsa Now को सब्सक्राइब करें।