आजादी के 80 साल बाद भी सहरसा जिले के रौता पंचायत अंतर्गत इनरवा गांव में रहने वाले दर्जनों महादलित परिवार मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब 35 परिवारों और 250 से अधिक आबादी वाले इस गांव में सड़क, पीने का पानी, शौचालय और जमीन जैसी बुनियादी जरूरतें आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इस Ground Report में देखिए इनरवा गांव की जमीनी हकीकत, जहां मुख्य सड़क से घरों तक पहुंचने के लिए पक्की और सुविधाजनक सड़क का अभाव बताया जा रहा है। संकरी गलियों के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, भूमिहीन परिवारों को सरकारी योजना के तहत कागजी दस्तावेज तो उपलब्ध कराए गए, लेकिन कई लोगों को अब तक जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल

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पाया है। उनका कहना है कि कागज पर मिले अधिकार को जमीन पर लागू होने का इंतजार अभी भी जारी है। ग्रामीणों ने नल-जल योजना का लाभ पूरी तरह नहीं मिलने, पीने के पानी की समस्या और कई परिवारों के लिए शौचालय जैसी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही है। कुछ ग्रामीणों ने राशन कार्ड बनवाने में पैसे मांगने और राशन वितरण में कम अनाज देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं रौता पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि देवानंद यादव ने कहा कि भूमिहीन परिवारों के कागजात उपलब्ध कराने की प्रक्रिया उनके स्तर से कराई गई है और आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों के स्तर से होनी है। उन्होंने सड़क और नल-जल से जुड़ी समस्याओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। सवाल यह है कि आखिर इनरवा गांव के इन परिवारों को सड़क, पानी, शौचालय और जमीन जैसी बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी? प्रशासन इन समस्याओं पर कब ठोस कार्रवाई करेगा