दोनों पैर हैं बेकार, लेकिन हौसला है बेमिसाल: बेटे के सपनों के लिए गाकर जीवन की जंग लड़ रहे हैं सहरसा के राजेश सहरसा: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल इंसान का रास्ता नहीं रोक सकती। सहरसा के राजेश इसी जज्बे की मिसाल हैं। दोनों पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने जिंदगी के सामने हार नहीं मानी। आज वे अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए गीत गाकर परिवार का सहारा बन रहे हैं। राजेश आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपने आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर आगे बढ़ रहे हैं। वे विभिन्न स्थानों पर गीत गाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं

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और उसी से होने वाली आय से अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ बेटे की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजेश की आवाज जितनी मधुर है, उससे कहीं अधिक प्रेरणादायक उनकी जिंदगी की कहानी है। उन्हें सुनने वाले लोग न केवल उनके गीतों की सराहना करते हैं, बल्कि उनके संघर्ष और हिम्मत को भी सलाम करते हैं। राजेश का कहना है कि उनका सबसे बड़ा सपना अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाकर उसे जीवन में सफल बनाना है। वे चाहते हैं कि उनका बेटा उन कठिनाइयों का सामना न करे, जिनसे उन्हें गुजरना पड़ा। राजेश की कहानी यह संदेश देती है कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति के सपनों और हौसलों को नहीं रोक सकतीं। मजबूत इरादे, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। आज सहरसा के राजेश न केवल अपने परिवार के लिए उम्मीद की किरण हैं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं। सहरसा और कोसी-मिथिला की ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियों के लिए जुड़े रहें Saharsa Now के साथ।