कोसी का कहर: सहरसा के नौहट्टा में बाढ़ से जनजीवन बेहाल बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने उफान पर है। सहरसा जिले के नौहट्टा प्रखंड में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। कई गांवों में घर, आंगन, रसोई और पेयजल के साधन तक बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। कभी जहां बच्चों की हंसी और चहल-पहल सुनाई देती थी, वहां अब सन्नाटा और चिंता का माहौल है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के लिए नाव ही आवागमन का मुख्य साधन बन गई है। लोग जान जोखिम में डालकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंच रहे हैं। कई ग्रामीण कमर तक पानी

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में उतरकर अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाने को मजबूर हैं। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। खाना बनाने, पीने का साफ पानी जुटाने और बीमार लोगों तक दवा पहुंचाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह प्रभावित हुई है। स्कूल जाने वाले रास्ते जलमग्न हैं और किताबों की जगह उनके सामने बाढ़ की भयावह तस्वीर है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ से बचाव, तटबंधों की मजबूती और राहत व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी नहीं बदले हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कोसी का कहर हर वर्ष लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर देता है। इसी स्थिति का जायजा लेने के लिए हमारे संवाददाता समसूल हुदा बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने पानी से घिरे गांवों, संघर्ष करते ग्रामीणों और परेशान परिवारों की स्थिति को कैमरे में कैद किया। बाढ़ पीड़ितों की जुबान पर एक ही सवाल है— आखिर कब तक कोसी का यह कहर उनकी जिंदगी और सपनों को प्रभावित करता रहेगा?