नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का सर्वे अभियान शुरू किया है। यह सर्वे विशेष रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है जो कई वर्षों से नेपाल में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास नेपाल की नागरिकता या अन्य आवश्यक वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। फिलहाल यह अभियान नवलपरासी जिले के रानीनगर, त्रिवेणी और महेशपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में चलाया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की टीम घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र कर रही है। इसमें संबंधित व्यक्ति का नाम, पता, परिवार के सदस्यों का विवरण,

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नेपाल में रहने की अवधि और उनके पास उपलब्ध पहचान पत्रों या अन्य दस्तावेजों की जानकारी दर्ज की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों का सही और अद्यतन रिकॉर्ड तैयार करना बताया जा रहा है। नेपाल प्रशासन के अनुसार, इस सर्वे का मकसद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना, जनसंख्या से जुड़ा सटीक डेटा तैयार करना तथा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। प्रशासन का कहना है कि सर्वे के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर भविष्य में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने में सुविधा होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह केवल एक सर्वे अभियान है। अभी तक सरकार की ओर से किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई, निष्कासन या नागरिकता से जुड़े किसी नए निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सर्वे पूरा होने के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट नेपाल सरकार को सौंपी जाएगी। इसके बाद सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की रणनीति और आवश्यक कदमों पर निर्णय लेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच इस सर्वे को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन प्रशासन ने लोगों से सहयोग करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सरकार का कहना है कि फिलहाल यह केवल जानकारी जुटाने की प्रक्रिया है और आगे की किसी भी कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की जाएगी।