कोसी की धरती पर खेती करना हमेशा से किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। सहरसा जिले के महिषी प्रखंड की नहरवार पंचायत में इस बार किसानों ने बड़े उत्साह और उम्मीद के साथ बड़े पैमाने पर मक्के की खेती की थी। किसानों को भरोसा था कि अच्छी फसल होगी और मेहनत का बेहतर परिणाम मिलेगा, लेकिन मौसम की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों को झटका दे दिया। इस साल अनियमित बारिश, लगातार बढ़ती गर्मी और पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था की कमी के कारण मक्के की फसल प्रभावित हुई। खेतों में पौधे तो खड़े रहे, लेकिन भुट्टों

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का आकार छोटा रह गया और उत्पादन में काफी गिरावट दर्ज की गई। किसानों के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पैदावार काफी कम हुई है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। खेती की बढ़ती लागत भी किसानों के लिए बड़ी चिंता बनकर सामने आई है। महंगे बीज, खाद, डीजल, कीटनाशक और मजदूरी के खर्च ने किसानों का बजट बिगाड़ दिया है। कई किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में जितना खर्च हुआ, उतनी आमदनी मिलने की उम्मीद कम है। ऐसे में खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। फसल उत्पादन में कमी के साथ-साथ बाजार में मक्के का उचित मूल्य नहीं मिलना किसानों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराए, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था करे और फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करे, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके। हालांकि, तमाम मुश्किलों के बावजूद कोसी के किसानों की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। वे चाहते हैं कि आने वाले समय में मौसम उनका साथ दे, खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिले। किसानों का विश्वास है कि बेहतर व्यवस्था और सहयोग के साथ मक्के की खेती फिर से खुशहाली और समृद्धि का आधार बन सकती है।