डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे? जानिए कश्मीर आंदोलन, जनसंघ की स्थापना और उनकी मौत से जुड़े तथ्य भारतीय राजनीति के इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम एक महत्वपूर्ण नेता के रूप में दर्ज है। वे शिक्षाविद, वकील, सांसद और बाद में भारतीय जनसंघ के संस्थापक बने। उनके राजनीतिक विचारों और कश्मीर को लेकर उठाए गए मुद्दों का प्रभाव आज भी भारतीय राजनीति में देखा जाता है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का प्रारंभिक जीवन

Featured Image

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई। वे कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति भी बने। भारतीय जनसंघ की स्थापना 1951 में डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। इस राजनीतिक दल को आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक आधार माना जाता है। उनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और मजबूत संघीय व्यवस्था पर जोर देना था। कश्मीर आंदोलन क्यों शुरू हुआ? स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर में लागू विशेष व्यवस्था और परमिट प्रणाली का डॉ. मुखर्जी ने विरोध किया। उनका मानना था कि एक देश में अलग-अलग संवैधानिक व्यवस्थाएं राष्ट्रीय एकता के अनुरूप नहीं हैं। इसी संदर्भ में उनका प्रसिद्ध नारा सामने आया— "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।" गिरफ्तारी और मृत्यु 1953 में जम्मू-कश्मीर में प्रवेश के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। हिरासत के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु को लेकर वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों और इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत और चर्चाएं होती रही हैं। आज भी क्यों चर्चा में रहते हैं? डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम कश्मीर, राष्ट्रीय एकता, जनसंघ के इतिहास और भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण अध्यायों में लिया जाता है। उनके विचारों और राजनीतिक योगदान पर आज भी व्यापक चर्चा होती है।