महंगे डीएपी और खाद की कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
कृषि यंत्रीकरण मेले में पहुंचे किसानों ने अपनी पीड़ा खुलकर सामने रखी। बढ़ती लागत, महंगी खाद, और समय पर उपलब्धता न होने से खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। किसानों ने बताया कि इस बार डीएपी और यूरिया की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे बीज बोने से लेकर फसल तैयार होने तक खर्च कई गुना बढ़ गया है।
मेले में जहां एक ओर आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया, वहीं दूसरी ओर किसानों का गुस्सा और दर्द साफ दिखा। ट्रैक्टर, थ्रेशर, मिनी टिलर और ड्रिप सिंचाई जैसे आधुनिक साधनों से खेती आसान होने की बातें तो की गईं, लेकिन वास्तविकता यह है कि महंगे इनपुट कॉस्ट के कारण छोटे और मध्यम वर्ग के किसान इन उपकरणों तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं।
किसानों ने कहा कि सरकार भले ही योजनाओं की बात कर रही हो, लेकिन ज़मीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। महंगा डीएपी, खाद की किल्लत, फसल की सही कीमत न मिलना—इन सभी कारणों ने किसानों का हौसला कमजोर कर दिया है।
मेले में आए कई किसानों की यही मांग रही कि खाद की कीमतों को नियंत्रण में लाया जाए, समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और छोटे किसानों को सब्सिडी व सहायता बढ़ाई जाए, वरना खेती छोड़ने की नौबत आ जाएगी।
पूरी रिपोर्ट में किसानों की वास्तविक समस्याएँ और उनकी आवाज़ दिखती है।
