सुपौल जिले के घीवक गांव में वर्षों पुरानी एक बड़ी समस्या का फिलहाल समाधान निकल आया है। वार्ड नंबर 12 के लोगों की परेशानी को देखते हुए घीवक गांव को घूरन गांव से जोड़ने के लिए करीब 100 बांस से एक चचरी पुल का निर्माण कराया गया है। इस पुल के बनने के बाद ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। कभी जिस रास्ते से गुजरना लोगों के लिए मुश्किल और जोखिम भरा था, आज वहीं उम्मीद का एक नया पुल खड़ा है। इस चचरी पुल से सबसे बड़ी राहत स्कूली बच्चों को मिली है। पहले बच्चों को स्कूल जाने के लिए गंदे और पानी भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था। बरसात के दिनों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती थी। वहीं नमाज अदा करने के लिए मस्जिद जाने वाले लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। रात के समय अगर कोई

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बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। करीब 20 हजार रुपये की लागत से बने इस बांस के पुल ने फिलहाल दोनों गांवों के बीच पैदल आवाजाही को काफी आसान बना दिया है। हालांकि चारपहिया वाहनों की समस्या अभी भी बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा कर रहा है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए यहां एक पक्के पुल का निर्माण बेहद जरूरी है। यह सकारात्मक पहल पंचायत के सजग सामाजिक कार्यकर्ता और पंचायत के प्रमुख मुद्दों को लगातार उठाने वाले नौशाद आलम की कोशिश से संभव हो सकी। ग्रामीण इस पहल की सराहना कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले समय में प्रशासन भी उनकी इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा। ग्रामीणों की आंखों में अब एक ही सपना है—चचरी पुल की जगह जल्द एक मजबूत और पक्का पुल बने, ताकि घीवक और घूरन गांव के लोगों की वर्षों पुरानी परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो सके।