Special Report: क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम वैज्ञानिक कई दिन पहले ही कैसे बता देते हैं कि कब बारिश होगी, कहां आंधी आएगी या किस दिन तेज धूप पड़ेगी? आखिर बारिश, हवा, तापमान और धूप को कैसे मापा जाता है? इस विशेष रिपोर्ट में जानिए मौसम विज्ञान की पूरी प्रक्रिया। मौसम विभाग देशभर में स्थापित ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों (AWS), डॉप्लर वेदर रडार, मौसम उपग्रह (Weather Satellites) और हजारों सेंसरों से लगातार आंकड़े जुटाता है। इन आंकड़ों में तापमान, वायुदाब, आर्द्रता (Humidity), हवा की दिशा और गति, बादलों की स्थिति तथा वर्षा की मात्रा शामिल होती है। इसके बाद सुपर कंप्यूटर इन आंकड़ों का विश्लेषण कर मौसम का पूर्वानुमान तैयार करते हैं।

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बारिश कैसे मापी जाती है? बारिश को रेन गेज (Rain Gauge) नामक उपकरण से मापा जाता है। यह बताता है कि किसी स्थान पर कितने मिलीमीटर (mm) वर्षा हुई। उदाहरण के लिए, यदि 24 घंटे में 50 मिमी बारिश दर्ज होती है, तो इसका मतलब है कि समतल सतह पर 50 मिमी ऊंचाई तक पानी जमा हो सकता है। हवा की गति और दिशा कैसे मापी जाती है? हवा की गति मापने के लिए एनीमोमीटर (Anemometer) का उपयोग किया जाता है, जबकि हवा किस दिशा से चल रही है, यह जानने के लिए विंड वेन (Wind Vane) का इस्तेमाल होता है। इन आंकड़ों से तूफान और आंधी की संभावना का अनुमान लगाया जाता है। धूप और तापमान कैसे मापा जाता है? तापमान थर्मामीटर और आधुनिक डिजिटल सेंसर से मापा जाता है। वहीं सूर्य की किरणों (Solar Radiation) की तीव्रता को विशेष उपकरणों से रिकॉर्ड किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि दिन में कितनी धूप रहेगी और उसका तापमान पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सैटेलाइट और रडार की क्या भूमिका है? मौसम उपग्रह अंतरिक्ष से बादलों की तस्वीरें भेजते हैं, जबकि डॉप्लर वेदर रडार बादलों की गति, ऊंचाई, वर्षा और तूफान की दिशा का पता लगाता है। यही कारण है कि आज मौसम विभाग पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक पूर्वानुमान देने में सक्षम है। हालांकि मौसम एक प्राकृतिक और लगातार बदलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद पूर्वानुमान संभावनाओं पर आधारित होता है और समय-समय पर अपडेट किया जाता है। Saharsa Now की इस विशेष रिपोर्ट में हम मौसम विज्ञान, मानसून, बाढ़, जलवायु परिवर्तन और मौसम से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए सरल भाषा में लेकर आते रहेंगे।