Special Report | Bihar News: बिहार की सबसे चर्चित सामाजिक घटनाओं में से एक "पकड़ौआ बियाह" लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इस प्रथा में कथित तौर पर किसी युवक का अपहरण कर उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करा दिया जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका प्रसार मुख्य रूप से 1970 और 1980 के दशक में देखा गया, जब दहेज प्रथा, सरकारी नौकरी वाले युवकों की बढ़ती मांग और सामाजिक दबाव जैसी परिस्थितियों ने इसे बढ़ावा दिया। इतिहासकारों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रथा की शुरुआत को लेकर कोई आधिकारिक या सर्वमान्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका उल्लेख बिहार के कुछ जिलों, विशेषकर बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों के संदर्भ में मिलता है। समय के साथ यह प्रथा सामाजिक बहस और फिल्मों तक का विषय बनी।

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हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि आज के बिहार की पहचान इस कुप्रथा से नहीं की जा सकती। समय के साथ ऐसे मामलों में काफी कमी आई है, लेकिन बीच-बीच में कुछ कथित घटनाएं सामने आने पर यह मुद्दा फिर चर्चा में आ जाता है। ऐसे मामले अपवाद स्वरूप होते हैं, न कि सामान्य सामाजिक व्यवहार का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारतीय कानून के तहत किसी भी व्यक्ति का अपहरण कर या उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह कराना पूरी तरह अवैध और दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में अपहरण, आपराधिक धमकी, अवैध बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। न्यायालयों ने भी कई मामलों में जबरन कराए गए विवाहों को कानूनी चुनौती मिलने पर राहत प्रदान की है।