ऑक्सफोर्ड से जुड़े विद्वानों के साथ होगा मिथिला संस्कृत शोध संस्थान का सहयोग? दुर्लभ पांडुलिपियों को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
08/07/2026 4:21 PM Total Views: 883

बिहार की प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। दरभंगा स्थित मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और Oxford Sanskrit Text Society के बीच संस्थागत सहयोग (MoU) का प्रस्ताव रखा गया है। इस संबंध में राज्यसभा सांसद एवं जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति देने का अनुरोध किया है।
प्रस्ताव के अनुसार, संस्थान में सुरक्षित हजारों दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक कैटलॉग तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण, समालोचनात्मक संपादन (Critical Edition), संयुक्त शोध, अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन, शोधार्थियों के आदान-प्रदान, कार्यशालाओं और फेलोशिप जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे बिहार की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध को प्राथमिकता दे रही है तथा यह पहल ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को भी मजबूती दे सकती है।यहाँ क्लिक करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के आधुनिकीकरण की घोषणा की थी। इसके बाद बिहार कैबिनेट ने संस्थान के विकास और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी दोनों संस्थानों के बीच MoU पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। फिलहाल Oxford Sanskrit Text Society की ओर से सहयोग का प्रस्ताव भेजा गया है और राज्य सरकार की प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो बिहार की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
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बिहार की प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। दरभंगा स्थित मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और Oxford Sanskrit Text Society के बीच संस्थागत सहयोग (MoU) का प्रस्ताव रखा गया है। इस संबंध में राज्यसभा सांसद एवं जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति देने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव के अनुसार, संस्थान में सुरक्षित हजारों दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक कैटलॉग तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण, समालोचनात्मक संपादन (Critical Edition), संयुक्त शोध, अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन, शोधार्थियों के आदान-प्रदान, कार्यशालाओं और फेलोशिप जैसे
क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे बिहार की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और शोध को प्राथमिकता दे रही है तथा यह पहल 'ज्ञान भारतम् मिशन' को भी मजबूती दे सकती है। गौरतलब है कि जनवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के आधुनिकीकरण की घोषणा की थी। इसके बाद बिहार कैबिनेट ने संस्थान के विकास और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी दोनों संस्थानों के बीच MoU पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। फिलहाल Oxford Sanskrit Text Society की ओर से सहयोग का प्रस्ताव भेजा गया है और राज्य सरकार की प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो बिहार की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को वैश्विक शोध समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। [embed]https://youtu.be/z6RKxqQukx4?si=6zCRbb86FSj67XVY[/embed]
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