[embed]https://youtu.be/ohArY8dpYLA?si=v8o1UQGfCFQ_rmBD[/embed] बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में तेजी से कम होती देसी मछलियों की प्रजातियों का संरक्षण करना और मछली पालकों की आय बढ़ाना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इच्छुक आवेदक 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत माइनर कार्प, कैट फिश, वायु-श्वासी देसी मछलियां, झींगा पालन और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि

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इससे मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और किसानों का शुरुआती निवेश भी कम होगा। यह योजना बिहार के सभी 38 जिलों में लागू होगी। निजी तालाबों के साथ-साथ नियमानुसार पट्टे पर लिए गए सरकारी तालाबों के लिए भी लाभ उपलब्ध होगा। विभाग गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक हैचरी प्रणाली को भी बढ़ावा देगा, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि की उम्मीद है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक लाभार्थी बिहार मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। विभाग के अनुसार, एक परिवार या एक व्यक्ति को योजना के तहत केवल एक पात्र घटक पर ही अनुदान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा, कोसी, गंडक, बागमती समेत राज्य की नदियों और जलाशयों को देखते हुए बिहार में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है, तो इससे देसी मछलियों के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार, किसानों की आय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।[embedyt] https://www.youtube.com/watch?v=ohArY8dpYLA[/embedyt]